नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के पीछे एक विशाल ग्लेशियर के टूटकर गिरने की घटना को मुख्य कारण बताया जा रहा है। करीब 2,000 फीट चौड़ा बर्फ का बड़ा हिस्सा लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई से टूटकर करीब 4,000 फीट नीचे घाटी में गिरा।
इस घटना के बाद भोटे कोशी नदी क्षेत्र में अचानक पानी, बर्फ, चट्टानों और मलबे का तेज बहाव शुरू हो गया। नेपाल के रसुवा और नुवाकोट समेत सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही की खबर है।
ग्लेशियर का इतना बड़ा हिस्सा कैसे गिरा?
लांगटांग लिरुंग पर्वत क्षेत्र से ग्लेशियर का विशाल हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इतनी ऊंचाई से भारी बर्फ के गिरने के कारण जबरदस्त ऊर्जा पैदा हुई। रिपोर्टों में इस घटना से जुड़े कंपन को 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटकों के रूप में दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
ग्लेशियर के गिरने के बाद बर्फ, पानी और मलबा नदी घाटी में जमा हो गया। इससे कुछ समय के लिए नदी का रास्ता बाधित हुआ और प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बन गई।
कुछ ही मिनट में बदल गई नदी की तस्वीर
प्राकृतिक अवरोध टूटने के बाद पानी और मलबे का तेज सैलाब नीचे की ओर बढ़ा। संकरी पहाड़ी घाटियों में पानी की ऊंचाई और रफ्तार तेजी से बढ़ गई।
रिपोर्टों के अनुसार, निचले इलाकों में बारिश नहीं होने के बावजूद नदी का जलस्तर करीब 30 फीट तक बढ़ गया। यही वजह है कि यह घटना सामान्य बारिश से आने वाली बाढ़ के बजाय अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के रूप में सामने आई।
तबाही में सैकड़ों लोग लापता
नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में बाढ़ से बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबर है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों को मिलाकर 270 से ज्यादा मौतों की पुष्टि बताई गई है।
लापता लोगों की संख्या भी 800 से ज्यादा बताई जा रही है। इनमें स्थानीय लोगों के साथ विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान आंकड़े बदल सकते हैं।
भारतीय नागरिकों के भी बड़ी संख्या में लापता होने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में यह संख्या अलग बताई गई है, इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़े का इंतजार है।
भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता
नेपाल की नदियों में अचानक बढ़े जलस्तर के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर को लेकर निगरानी बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है।
भारत के विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल राहत और बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लापता लोगों की तलाश के साथ प्रभावित इलाकों में स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
भारतीय नागरिकों के परिवारों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी लापता व्यक्ति की जानकारी के लिए भारत सरकार और भारतीय दूतावास की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
आम लोगों पर क्या असर?
नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में अचानक आई बाढ़ से सड़क संपर्क, स्थानीय आवागमन और कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं। पर्यटन और तीर्थयात्रा से जुड़े लोगों के लिए भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदियों और निचले इलाकों के पास जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की जरूरत है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- करीब 2,000 फीट चौड़ा ग्लेशियर का हिस्सा टूटने की जानकारी है।
- ग्लेशियर करीब 17,000 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरा।
- मलबे और पानी से भोटे कोशी नदी क्षेत्र प्रभावित हुआ।
- नेपाल और तिब्बत में 270 से ज्यादा मौतों की खबर है।
- 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की रिपोर्ट है।
- भारतीय नागरिकों के भी बड़ी संख्या में लापता होने की जानकारी सामने आई है।
- नेपाल के रसुवा और नुवाकोट क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित बताए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1. नेपाल में अचानक बाढ़ क्यों आई?
रिपोर्टों के अनुसार, विशाल ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा। इसके बाद पानी और मलबे के तेज बहाव से अचानक बाढ़ आई।
सवाल 2. ग्लेशियर कितना बड़ा था?
बताई गई जानकारी के अनुसार, टूटकर गिरा ग्लेशियर का हिस्सा करीब 2,000 फीट चौड़ा था।
सवाल 3. क्या भारतीय नागरिक भी लापता हैं?
हां। अलग-अलग रिपोर्टों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों और तीर्थयात्रियों के लापता होने की जानकारी दी गई है। अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।
सवाल 4. क्या भारत में भी खतरा है?
नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
निष्कर्ष
नेपाल-तिब्बत सीमा पर विशाल ग्लेशियर के टूटने के बाद आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार अपडेट किए जा रहे हैं।