इंदौर में ida indore की स्कीम 171 के करीब 6 हजार प्लॉटधारकों ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। रहवासी 33 साल से अपने प्लॉट का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आईडीए कार्यालय पहुंचकर जमीन को योजना से मुक्त करने की मांग उठाई।
आईडीए कार्यालय में प्रदर्शन
13 सोसायटियों के रहवासी आईडीए कार्यालय पहुंचे। कुछ प्रदर्शनकारी बोर्ड मीटिंग रूम में भी दाखिल हुए। वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
रहवासियों ने कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से जल्द अंतिम निर्णय लेने की मांग की।
5.89 करोड़ रुपये जमा, फिर भी इंतजार
रहवासियों के अनुसार दिसंबर 2024 में करीब 5.89 करोड़ रुपये विकास शुल्क जमा किया गया था। इसके बावजूद जमीन को योजना से मुक्त नहीं किया गया।
यह मामला लंबे समय से प्रशासन और प्लॉटधारकों के बीच बना हुआ है। निर्माण और जमीन के उपयोग पर भी इसका असर पड़ा है।
1993 से शुरू हुआ विवाद
आईडीए ने 1993 में पहले स्कीम 132 घोषित की थी। प्लॉटधारक इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे। बाद में यह योजना खत्म हुई।
साल 2009 में इसी जमीन पर स्कीम 171 लाई गई। रहवासियों का दावा है कि इसके बाद भी पर्याप्त विकास कार्य नहीं हुआ।
जून 2026 में विधायक महेंद्र हार्डिया ने मुख्यमंत्री के सामने मामला उठाया था। कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद भी समाधान नहीं हुआ।
अब आगे क्या?
प्रदर्शनकारियों ने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की बात कही है। कुछ रहवासी अनशन की तैयारी भी कर रहे हैं।
इस मामले से जुड़े लोग अब high court case status, high court mp और high court indore cause list जैसी जानकारी भी तलाश रहे हैं। योजना से जुड़े दस्तावेजों में scheme information document और yojana info भी अहम हैं।
वहीं, scheme 78 vijay nagar जैसे दूसरे क्षेत्रों से जुड़े आईडीए मामलों से इसे अलग समझना जरूरी है।
FAQ
1. स्कीम 171 में कितने प्लॉटधारक प्रभावित हैं?
स्कीम 171 से करीब 6 हजार प्लॉटधारक जुड़े हैं।
2. प्लॉटधारक कितने समय से जमीन का इंतजार कर रहे हैं?
प्लॉटधारक करीब 33 साल से अपने प्लॉट का इंतजार कर रहे हैं।
3. विकास शुल्क के रूप में कितनी राशि जमा हुई है?
रहवासियों के अनुसार करीब 5.89 करोड़ रुपये विकास शुल्क जमा किए गए हैं।
4. प्रदर्शनकारियों ने आईडीए से क्या मांग की है?
उन्होंने जमीन को योजना से मुक्त करने और प्लॉट का कब्जा दिलाने की मांग की है।
5. स्कीम 171 को लेकर आगे क्या हो सकता है?
मांग पूरी नहीं होने पर रहवासी आंदोलन और अनशन तेज कर सकते हैं।